सम्पूर्ण चाणक्य नीति, चाणक्य का जन्म लगभग चार सौ साल पूर्व भारत के तछशिला नामक स्थान में हुआ | चाणक्य के बचपन का नाम विष्णुगुप्त शर्मा था | कटुज गोत्र मे होने के कारण उनका नाम कौटिल्य हुआ | चणक के पुत्र होने के कारण  वे चाणक्य कहलाये, अपने चतुर बुद्धि  होने के कारण भी वे चाणक्य कहलाये | वे बुद्धिवान और नीतिवान थे | भारतीय राजनीती में चाणक्य का स्थान सर्वश्रेष्ट और सर्वोपरि माना जाता है | चाणक्य ने अपनी प्राम्भिक शिक्षा तक्षशिला में प्राप्त किये, प्राम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पाटलिपुत्र आये |

मगध के शासन पे तब अत्यन्त लोभी और अत्याचारी राजा घनानन्द विराजमान था | चाणक्य विद्वान् तो थे मगर उनका रूप कुरूप था वो कृष्ण वर्ण के थे, एक बार उनको राजा ने दरबार में बुलाया जहाँ और भी मंत्री दरबारी लोग उपस्थित थे जब चाणक्य दरबार में  पहुँचे तो  राजा ने उनके रूप को लेकर उनका अपमान किया भरी सभा मे ही | चाणक्य को क्रोध आया फिर उन्होने अपनी चोटी खोल दी और बोले की हे राजा आज जो अपमान तुमने मुझे इस भरी सभा में किया है मै एक दिन इसका प्रतिशोध अवश्य  लुँगा | और प्रण लिया की जबतक मै किसी योग्य इंसान को ना इस मगध के सिंहासन पे ना बैठा दु तबतक मै अपनी चोटी नहीं बाँधूगा | चाणक्य ने एक साधारण युवक चन्द्रगुप्त को अपने बुद्धिमत्ता से विशाल मगध के साम्राज्य का अधिपति बनाया, इसीलिए उन्हें कुटनीति का सम्राट भी कहा जाता है इससे हमे पता चलता है की चाणक्य कितने द्वढ संकल्पी थे |  ये था चाणक्य के जीवन का एक छोटा सा वृतांत |

Chanakya Niti in Hindi | सम्पूर्ण चाणक्य नीति | Niti in Hindi


वैसे तो चाणक्य ने अपने जीवन में अनेको ग्रंथ लिखे (niti in hindi) उनमे से लघु चाणक्य, वृद्ध चाणक्य, चाणक्य नीतिदर्पण, कौटिल्य अर्थशास्त्र तथा चाणक्य सूत्र आदि अनेको ग्रंथ प्रसिद्ध हैं | चाणक्य के द्वारा लिखी पुस्तक अर्थशास्त्र मे शासन सम्बन्धी जो सिद्धान्तहैं वे आज भी अदुतिये हैं | 

चाणक्य के द्वारा लिखी हुई नीतियों को आज चाणक्य निति (chanakya niti in hindi) के नाम से जाना जाता हैं आज हमलोग इस लेख में  उनके द्वारा लिखे गए चाणक्य निति का अध्ययन करेंगे |

  1. आचार्य चाणक्य ने अपने चाणक्य निति में कहा है की राज्य  में राजा नहीं है तो अच्छा हैं, किन्तु बुरे राजा अर्थात अत्याचारी राजा होना अच्छा नहीं हैं                                                                                       
  2. यदि किसी का मित्र नहीं हैं तो अच्छा है किन्तु कुमित्र अर्थात बुरे मित्र होना अच्छा नहीं हैं                          
  3. यदि किसी का  कोई शिष्य ना हो तो अच्छा है किन्तु निन्दित शिष्य का होना अच्छा हैं                              
  4. पत्त्नी अगर ना हो तो अच्छा है मगर चरित्रहीन पत्त्नी का होना अच्छा नहीं हैं                                              
चाणक्य ने मैत्री के सम्बन्ध में बताते हुए अपने निति ग्रंथ में कहा हैं की कैसे हमे मित्रता की कसौटी को परखना चाहिए | 

परोक्ष रूप में अर्थात पीठ पीछे बुराई करके काम बिगाड़ने वाले और प्रत्यक्ष अर्थात सामने मीठा बोलने वाले मित्र का अवश्य परित्याग कर देना चाहिए | वह मित्र उस विष से भरे हुए घड़े के सामान हैं जिसके मुख के ऊपर थोड़ा दूध लगा रहता हैं | 

आचार्य चाणक्य ने अपने चाणक्य निति में बताया  है की एक पिता को अपने पुत्र के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए | 

पुत्र को पांच वर्ष तक प्यार करना चाहिए, जब वो दस वर्ष का हो जाये तो उस पर अनुशासन रखनी चाहिए, जब वह सोलह वर्ष का हो जाए तो उसके साथ मित्र के सामान व्यवहार करनी चाहिए | 

लौकिक सुख के बारे में आचर्य चाणक्य अपने ग्रंथ में लिखा  है की 

जिस व्यक्ति के घर में सुन्दर स्त्री हो, लक्ष्मी हो अर्थात धन-धान्य से पूर्ण हो हो, पुत्र और पौत्र गुणों से युक्त हो, वह घर तो इस पृथ्वीलोक में इंद्रलोक से भी अधिक सुन्दर  हैं कहने का मतलब है की जिस तरह इंद्रलोक में सुख वैभव हैं उसी प्रकार उस घर में भी वो सबकुछ हैं |

आचार्य चाणक्य ने मुर्ख व्यक्ति के सम्बन्ध में  लिखा है की उनसे दूर रहे | 

चाणक्य कहते है की मुर्ख व्यक्ति से दूर रहना चाहिए , क्योंकि मुर्ख व्यक्ति उस दो पैर वाले जानवर के सामान हैं जिसमे प्रत्यक्ष रूप से काँटे तो नहीं दिखलायी नहीं देते हैं, किन्तु वह बार-बार वाक्यशल्य से काँटे बोता रहता हैं | 
वास्तव में देखा जाये तो चाणक्य ने जिन नीतियों का प्रतिपादन किया वो हमे कल्याण के मार्ग पे चलने के लिए प्रेरित करती हैं | आचार्य चाणक्य अपने नीतियों में जीवन के कठोर सच को उजागर किया हैं

चाणक्य निति छात्र जीवन के लिए (chanakya niti for students)

आचार्य चाणक्य ने विद्यार्थी जीवन के लिए भी कुछ नीतियों का समावेश किया हैं आज हम ये जानेंगे की कैसे कोई विद्यार्थी अपने जीवन में चाणक्य  के नीतियों का पालन कर अपने विद्यार्थी जीवन को सफल बना सकते हैं |
चाणक्य ने विद्यार्थी जीवन के लिए कुछ इस प्रकार की नीतिया बनाई हैं अपने ग्रंथ में |
चाणक्य बोलते हैं की विद्यार्थी  को अपने जीवन में इन आठ दोषों का परित्याग कर देना चाहिए | वो इस प्रकार है
काम,  क्रोध, लोभ, स्वादिष्ठ पदार्थो का सेवन, श्रृंगार, हंसी-मजाक, निंद्रा, अपने शरीर सेवा में अधिक समय न देना | 

1. विद्यार्थी को काम भावनाओं से बचना चाहिए :
जिस व्यक्ति के मन में काम वासना उत्पन्न होती रहती है, वह व्यक्ति हर समय अशांत रहने लगता है। ऐसा व्यक्ति अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सही-गलत कोई भी रास्ता अपना सकता है। इसी प्रकार अगर कोई विद्यार्थी काम वासना के चक्कर में पड़ जाए, तो वह पढ़ाई छोड़कर दूसरे कामों की ओर आकर्षित होने लगता है। उसका सारा ध्यान केवल अपनी काम वासना की पूर्ति की ओर लगने लगता है और वह पढ़ाई-लिखाई से बहुत दूर हो जाता है और ऐसे विद्यार्थी अपने शरीर का भी नाश कर लेता हैं कुसंगति से | इसलिए विद्यर्थियों को  हमेशा ऐसी भावनाओं के बचना चाहिए।

2. विद्यार्थी को प्रयास करना चाहिए की वो क्रोध न करें: 
क्रोध में व्यक्ति अँधा हो जाता है, उसे सही गलत की पहचान नहीं रह जाती है, और जो व्यक्ति क्रोधी स्वभाव है और छोटी से छोटी बात पर भी गुस्सा होकर कुछ ऐसा कर बैठता है जिसके लिए आगे जाकर पछताना पड़े वैसे लोग क्रोध आने पर किसी का भी बुरा कर बैठते हैं | ऐसे स्वभाव वाले व्यक्ति का मन कभी भी शांत नहीं रहता। विद्या प्राप्त करने के लिए मन का शांत और एकचित्त होना बहुत जरूरी होता है। अशांत मन से शिक्षा प्राप्त करने पर मनुष्य केवल उस ज्ञान को सुनता है, उसे समझ कर उसका पालन कभी नहीं कर पाता। इसलिए शिक्षा प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी होता है।

3. विद्यार्थी को कभी भी लोभ नही करना चाहिए:
हमलोग बचपन से सुनते आ रहे हैं की लालच बुरी बला है, हम सबने से सुना और पढ़ा है, लोभी व्यक्ति अपने फायदे के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और किसी के साथ भी धोखा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति सही-गलत के बारे में बिलकुल नहीं सोचते। जिस के मन में दूसरों की वस्तु पाने या हक़ छीनने की भावना होती है और हमेशा उसे पाने की योजना बनाने में ही लगा रहता है। ऐसा व्यक्ति कभी भी अपनी विद्या के बारे में सतर्क नहीं रह सकता  और अपना सारा समय अपने लालच को पूरा करने में गंवा देता है। विद्यार्थी को कभी भी अपने मन में लोभ या लालच की भावना नहीं आने देना चाहिए।

4. विद्यार्थी को अपने जीभ पर संयम होना चाहिए भोजन के चक्कर में हमेशा न रहें:
जिस मनुष्य की जीभ उसके वश में नहीं होती, वह हमेशा ही स्वादिष्ठ व्यंजनों की खोज में लगा रहता है। ऐसा व्यक्ति अन्य बातों को छोड़ कर केवल खाने को ही सबसे ज्यादा अहमियत देता है। कई बार स्वादिष्ठ व्यंजनों के चक्कर के इंसान अपने स्वास्थ तक के साथ समझौता कर बैठता है। विद्यार्थी को अपनी जीभ पर संयम रखनी चाहिए, ताकी वह अपने स्वास्थय और अपनी विद्या दोनों का ध्यान रख सकेक्योंकि जब तन और मन दोनो स्वस्थ हो तभी अच्छे मन से विद्या  ग्रहण कर सकते हैं |

5. अपनी शरीर सेवा ( श्रृंगार ) में अधिक समय न दे:
जिस किसी विद्यार्थी का मन सजने - सवरने में लग जाता है वह अपना ज्यादातर समय इन्ही बातों में गवां देता है। ऐसे मनुष्य खुद को हर वक्त सबसे सुन्दर और अलग दिखने के लिए ही सोचते रहते हैं, और इसी वजह से हमेश उनके दिमाग में सौंदर्य, अच्छे पहनावे और रहन -सहन से जुडी बातें ही घुमती रहती हैं। सजने-सवरने के बारे में सोचने वाला विद्यार्थी कभी भी एक जगह ध्यान केंद्रित करके विद्या नहीं प्राप्त कर पाता। विद्यार्थी को ऐसे परिस्थितियों से हमेशा बचना चाहिए।

6. विद्यार्थी को हमेशा हंसी-मजाक में समय व्यर्थ नहीं करनी चाहिए:
किसी अच्छे विद्यार्थी का एक सबसे महत्वपूर्ण गुण होता है वह हैं गंभीरता। विद्यार्थी को शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में सफलता पाने के लिए गंभीर होना बहुत ही जरूरी होता है। जो विद्यार्थी अपना सारा समय हंसी-मजाक में व्यर्थ कर देता है, वह कभी सफलता नहीं प्राप्त कर पाते हैं। विद्या  प्राप्त करने के लिए मन का स्थित होना अत्यन्त आवश्यक होता है और हंसी-मजाक में लगा रहना वाला विद्यार्थी अपने मन को कभी स्थिर नहीं रख पाता। इसलिए विद्यार्थी को गंभीर होना चाहिए |

7. आवश्यकता से अधिक सोने से बचना चाहिए:
स्वस्थ मनुष्य के लिए 6-7 घंटे सोना आवश्यक होता है, विद्यार्थोयों को भी इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए की वे आवश्यकता से अधिक निद्रा से बचें। अत्यधिक निद्रा से हमारे शरीर में हमेशा थकान बनी रहती है और अगर शरीर थका हो तो ध्यान केन्द्रित करना मुश्किल हो जाता है, और अध्ययन के लिए दिमाग का केन्द्रित होना अत्यंत आवश्यक होता है। इसलिए विद्यार्थी को निद्रा का परित्याग करना चाहिए |
आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गयी इन अमुल्य नीतियों को अपना कर हर विद्यार्थी अपने जीवन में सभी सपने को साकार कर सकता है और समाज कल्याण में अपना योग्दान कर सकता हैं |

देखा जाये तो ऐसे नीतिकार बहुत ही कम होते हैं, आचार्य चाणक्य एक महान कुटनीतज्ञ थे और कुटनीतज्ञो में उनका नाम हमेशा सर्वोपरि रहेगा | रूप से कुरूप कहे जाने वाले आचार्य चाणक्य ने अपने अलौकिक तेज से विश्व को अनूठी नीतिया प्रदान की, जो की पुरे विश्व में चाणक्य निति (Chanakya neeti for getting success in life) से प्रसिद्ध हुई | देखा जाये तो जहा आज के भौतिकवादी युग में जहां नैतिकता का पतन हो रहा हैं वहां महान आचार्य चाणक्य के द्वारा दी गई नीतिया समाज के प्रत्येक मनुष्य को सही मार्ग पे चलने के लिए प्रेरणा देती हैं जिससे प्रत्येक वर्ग व सम्पूर्ण राष्ट्र का कल्याण हो |

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Chanakya Niti in Hindi | सम्पूर्ण चाणक्य नीति | Niti in Hindi

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